शाहाबाद (हरदोई): शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मलकापुर में सोमवार और मंगलवार की मध्यरात्रि हुई रूह कंपा देने वाली डकैती ने न केवल पुलिस के सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, बल्कि प्रभारी निरीक्षक की कार्यकुशलता और उनके कमजोर नेतृत्व पर भी एक ऐसा गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है जिसे मिटाना अब आसान नहीं होगा। पांच नकाबपोश और हथियारबंद बदमाशों ने जिस दुस्साहसिक तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया, उसने पूरे जिले की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

खौफनाक मंजर: बंधक बना लूटी गई गृहस्वामी की खुशियां
वारदात सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 2:00 बजे की है, जब पूरा गांव गहरी नींद में था। तभी पांच नकाबपोश बदमाश दीवार फांदकर अनीश खान के घर में दाखिल हुए। असलहों के बल पर बदमाशों ने घर के सभी सदस्यों को मौत का डर दिखाकर बंधक बना लिया। बदमाशों ने घंटों तक घर के कोने-कोने को खंगाला और लाखों रुपये की नकदी व कीमती जेवरात समेट लिए। डकैतों के बेखौफ अंदाज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे काफी देर तक घर में तांडव मचाते रहे और स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सूचना पर पहुंचे आलाधिकारी, शुरू हुई कॉम्बिंग
लूट की सनसनीखेज सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सबसे पहले स्थानीय पुलिस और उसके बाद पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा, अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) मार्तंड प्रकाश सिंह तथा अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) आलोक राज नारायण भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और बदमाशों की तलाश के लिए सर्विलांस व एसओजी समेत कई टीमों का गठन किया। क्षेत्र में लगातार कॉम्बिंग की गई, लेकिन शाहाबाद पुलिस की ढीली गश्त का फायदा उठाकर बदमाश सुरक्षित भागने में सफल रहे।

आईजी का आगमन: स्थानीय पुलिस की नाकामी पर मुहर
घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे लखनऊ परिक्षेत्र की आईजी किरन एस को स्वयं धरातल पर उतरना पड़ा। आईजी ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और पीड़ित गृहस्वामी अनीश खान से बदमाशों की संख्या, उनके हुलिए और गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी ली। आईजी का स्वयं निरीक्षण के लिए आना इस बात का सीधा प्रमाण है कि जिला प्रशासन और विशेषकर प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह का स्थानीय सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। आईजी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र का उपयोग कर जल्द से जल्द खुलासा किया जाए।
प्रभारी निरीक्षक की जवाबदेही पर सुलगते सवाल
क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि आखिर प्रभारी निरीक्षक के निर्देशन में शाहाबाद की सुरक्षा इतनी लचर कैसे हो गई? जब बदमाश असलहों के साथ सड़कों पर घूम रहे थे, तब कोतवाली पुलिस की ‘हाई-टेक’ गश्त कहाँ थी? क्या प्रभारी निरीक्षक का सूचना तंत्र इतना खोखला हो चुका है कि उसे इतनी बड़ी डकैती की भनक तक नहीं लगी? रात्रि गश्त की जो जिम्मेदारी प्रभारी निरीक्षक की होती है, वह केवल कागजी खानापूर्ति तक सिमट कर क्यों रह गई है? अपराधियों के बुलंद हौसले चीख-चीख कर कह रहे हैं कि शाहाबाद पुलिस का इकबाल धराशायी हो चुका है।

भय के साये में जनता, क्या सुरक्षित है आपकी दहलीज?
मलकापुर की इस घटना ने केवल एक घर को नहीं लूटा, बल्कि पूरी तहसील की जनता के भरोसे को तार-तार कर दिया है। आईजी के आगमन और एसपी समेत दोनों एएसपी की मौजूदगी के बावजूद जनता के मन में यह खौफ है कि जब डकैतों को पुलिस का कोई डर नहीं, तो आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। अब देखना यह होगा कि लखनऊ से आई इस फटकार के बाद क्या प्रभारी निरीक्षक अपनी सुस्त कार्यप्रणाली में सुधार लाते हैं या शाहाबाद की जनता इसी तरह भय के साये में जीने को मजबूर रहेगी।