हरदोई पुकार — सौरभ सिंह संवादाता
शाहाबाद (हरदोई)। जनपद में कानून का डंडा आम जनता पर तो चलता है, मगर जब बात अधिकारियों की आती है, तो पुलिस और आरटीओ दोनों ही चुप्पी साध लेते हैं। शाहाबाद तहसील क्षेत्र में एक सरकारी गाड़ी — UP30AU2888, जिस पर “मजिस्ट्रेट” लिखा हुआ है, खुलेआम काले शीशों के साथ घूमती देखी गई। यह नजारा साफ बताता है कि कानून सिर्फ आम जनता के लिए बनाया गया है, अफसरों के लिए नहीं!

आम जनता की गाड़ियों पर काले शीशे दिखते ही पुलिस चालान काट देती है, रोककर वसूली करती है और सोशल मीडिया पर उसका खूब प्रचार-प्रसार भी करती है। जगह-जगह चेकिंग अभियान चलाकर जनता को कानून का पाठ पढ़ाया जाता है। लेकिन वही पुलिस, वही आरटीओ विभाग तब मौन हो जाता है जब नियम तोड़ने वाला कोई अधिकारी होता है।
सवाल उठता है कि आखिर हरदोई पुलिस और आरटीओ विभाग ने इस गाड़ी पर कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति के लिए कानून अलग है? अगर यही गाड़ी किसी आम नागरिक की होती, तो चालान, जब्ती और सोशल मीडिया पोस्ट तक तैयार हो जाती। मगर “मजिस्ट्रेट” का बोर्ड लगते ही कानून की धाराएं ठंडी पड़ जाती हैं।
यह मामला न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि हरदोई में कानून की तलवार केवल कमजोरों पर चलती है। जब अधिकारी खुद नियम तोड़ेंगे, तो जनता से पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है? सवाल बड़ा है और जवाब हरदोई प्रशासन के पास नहीं दिखता — क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर सिर्फ आम जनता के लिए ही न्याय की किताब खुलती है?