हरदोई पुकार


शाहाबाद भाजपा में ‘एक ही चेहरा–एक ही सत्ता’, बाकी सब बेगाने! ध्वजारोहण कार्यक्रम ने खोली अंदरूनी गुटबाज़ी की पोल

शाहाबाद विधानसभा की राजनीति इन दिनों किसी मसालेदार धारावाहिक से कम नहीं दिख रही। यहां भाजपा का मतलब अब संगठन, पदाधिकारी या कार्यकर्ता नहीं—बल्कि साफ तौर पर सिर्फ मंत्री रजनी तिवारी माना जा रहा है। इस कदर माना जा रहा है कि यदि कोई अन्य नेता भाजपा से टिकट का दावा करे, तो आधे लोग मुस्कुरा कर यही कह देते हैं—
“भाई साहब, भाजपा में सिर्फ एक ही हैं… बाकी तो समझ लो खानापूर्ति!”

आज शाहाबाद के एक प्रमुख तीर्थ स्थल पर भाजपा की एक महत्वाकांक्षी नेत्री ने ध्वजारोहण व नगर भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया। इरादा ताकत दिखाने का था, लेकिन हकीकत ने सारा खेल बिगाड़ दिया। भीड़ ऐसी थी कि गिनने चलो तो उंगलियाँ भी शर्माने लगें। झंडा तो फहरा, लेकिन राजनीतिक हवा बेदम निकलती दिखाई दी।

सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि—भाजपा नगर इकाई कहां गायब थी?
न कोई नगर अध्यक्ष दिखा, न उपाध्यक्ष, न पदाधिकारी, न युवा मोर्चा… मानो पूरा शहर उसी 1 घंटे में छुट्टी पर चला गया हो।

लेकिन असल खेल सोशल मीडिया पर शुरू हुआ!
कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आईं और नगर भाजपा के कुछ पदाधिकारी अचानक तेज़ी से सक्रिय हो गए। इशारे ऐसे कि किसी को नाम न लेकर भी निशाना चुभ जाए। उनके पोस्ट और कमेंट साफ कह रहे थे कि—शाहाबाद की भाजपा केवल और केवल मंत्री तिवारी की लाइन पर चलती है। बाकी किसी को नेता मानने का सवाल ही नहीं उठता।

यहीं से शाहाबाद की राजनीति में नया मसाला घुलने लगा।
लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि नगर कमेटी अब भाजपा की कम, मंत्री समर्थकों की टीम ज्यादा लगती है। संगठन की मजबूती का ढोल पीटा जाता है, पर जब टिकट की दावेदार एक नेत्री अपने दम पर कार्यक्रम करती है, तो पूरा नगर संगठन अंडरग्राउंड हो जाता है।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में आज पूरे दिन तंज और मीम का माहौल रहा—
“अगर भीड़ नहीं आई तो क्या हुआ, भाजपा नगर टीम तो आ सकती थी!”
“नेत्री जी के कार्यक्रम में इतनी शांति क्यों? क्या सबको किसी से डर लग गया था?”
“शाहाबाद भाजपा = रजनी तिवारी एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड।”

इन टिप्पणीओं ने न सिर्फ आज का माहौल चटपटा बना दिया, बल्कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति में उबाल भी ला दिया है।

सच्चाई यह है कि आज का कार्यक्रम एक आईना बनकर सामने आया—
शाहाबाद में भाजपा नाम का संगठन सिर्फ फाइलों और प्रेस नोटों में चल रहा है।
जमीन पर सिर्फ एक ही नेता का सिक्का चलता है।
बाकी नेता अगर कुछ करना चाहें, तो पहले उन्हें भीड़ नहीं—नगर कमेटी की मंजूरी चाहिए।

और आज की घटना यह साफ कर गई कि भाजपा में फिलहाल मंजूरी सिर्फ एक ही चेहरे को है… बाकी सब “भाजपाई” होने की पात्रता सूची में ही खड़े दिखाई देते हैं।

शाहाबाद की राजनीति का यह नया मोड़ आने वाले दिनों में और भी गर्मी लेकर आएगा।

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