मंत्री की मौजूदगी में ब्लॉक परिसर में बवंडर: सचिव ने ग्राम प्रधान पर लगाया मारपीट, अभिलेख फाड़ने और जान से मारने की धमकी का संगीन आरोप

मंत्री की मौजूदगी में ब्लॉक परिसर में बवंडर

मुख्य बिंदु (Highlights):

  • शाहाबाद ब्लॉक परिसर में ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम के दौरान हुई चौंकाने वाली घटना।
  • ग्राम पंचायत अधिकारी हर्षित सिंह ने फिरोजपुर खुर्द के प्रधान विवेक पाण्डेय पर लगाए गंभीर आरोप।
  • आरोप: शराब के नशे में धुत प्रधान व साथियों ने की गाली-गलौज, मारपीट और फाड़ डाले सरकारी अभिलेख।
  • पीड़ित सचिव ने कोतवाली शाहाबाद में तहरीर देकर सुरक्षा और कार्यवाही की गुहार लगाई।

हरदोई पुकार (शाहाबाद)।

बुधवार का दिन शाहाबाद ब्लॉक परिसर के लिए गहमागहमी भरा था। एक तरफ देश की एकता और अखंडता के प्रतीक ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम का आयोजन चल रहा था, जिसमें प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी मुख्य अतिथि के तौर पर मंचासीन थीं, तो वहीं दूसरी ओर, इसी परिसर में लोकतंत्र के दो स्तंभों (प्रशासन और पंचायत) के बीच टकराव का एक बेहद शर्मनाक अध्याय लिखा जा रहा था।

दिनदहाड़े, मंत्री और अधिकारियों की मौजूदगी में, एक ग्राम पंचायत अधिकारी को न केवल पीटा गया, बल्कि सरकारी दस्तावेज़ों को भी तार-तार कर दिया गया। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

मंत्री की मौजूदगी में ब्लॉक परिसर में बवंडर

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी और कोतवाली शाहाबाद में दी गई तहरीर के अनुसार, शाहाबाद विकास खंड में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) हर्षित सिंह बुधवार को अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन करने के लिए ब्लॉक परिसर में मौजूद थे। उसी समय, ब्लॉक सभागार और परिसर में ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें राज्यमंत्री रजनी तिवारी समेत ब्लॉक के अन्य अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सचिव हर्षित सिंह ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि इसी दौरान ग्राम पंचायत फिरोजपुर खुर्द के ग्राम प्रधान विवेक पाण्डेय अपने दो अज्ञात साथियों के साथ वहां आ धमके।

तहरीर के मुताबिक, ग्राम प्रधान और उनके साथी कथित तौर पर शराब के नशे में धुत थे। उन्होंने आते ही सचिव हर्षित सिंह को निशाना बनाया और उनके साथ अभद्रता शुरू कर दी। जब तक सचिव कुछ समझ पाते, तब तक प्रधान और उनके साथियों ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।

“गोली मारने” की धमकी और फाड़ दिए सरकारी अभिलेख

पीड़ित सचिव हर्षित सिंह का आरोप है कि यह विवाद केवल गाली-गलौज और मारपीट तक ही सीमित नहीं रहा। प्रधान विवेक पाण्डेय और उनके साथियों ने सचिव के हाथ में मौजूद सरकारी अभिलेख (संभवतः किसी पंचायत कार्य से संबंधित फाइलें या रजिस्टर) छीन लिए और उन्हें सरेआम फाड़ दिया।

सरकारी दस्तावेज़ों को फाड़ना न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि यह सीधे तौर पर राजकीय कार्य में बाधा डालने का मामला है।

यही नहीं, सचिव ने अपनी तहरीर में यह भी आरोप लगाया है कि मारपीट और अभिलेख फाड़ने के बाद, आरोपी प्रधान विवेक पाण्डेय और उनके साथियों ने उन्हें भविष्य में “गोली मारने” की धमकी दी और मौके से फरार हो गए।

इस पूरी घटना से ब्लॉक परिसर में अफरातफरी मच गई। एक तरफ मंत्री का कार्यक्रम चल रहा था और दूसरी तरफ यह हिंसक झड़प, जिसने सभी को सन्न कर दिया।


क्यों होता है प्रधान और सचिव में टकराव? (विश्लेषण)

यह घटना हरदोई जिले में कोई पहली या अकेली नहीं है। अक्सर ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) के बीच तनातनी की खबरें आती रहती हैं। हरदोई पुकार ने जब इस मामले की तह में जाने की कोशिश की, तो यह समझने की आवश्यकता महसूस हुई कि आखिर इन दोनों पदों के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या है।

  • भूमिका और जिम्मेदारी: ग्राम प्रधान गांव का निर्वाचित (elected) प्रमुख होता है, जो जनता के प्रति सीधे जवाबदेह होता है। वहीं, सचिव (पंचायत सेक्रेटरी) एक सरकारी कर्मचारी होता है, जो विकास कार्यों के वित्तीय और प्रशासनिक हिस्से को संभालता है। वह सरकार और पंचायत के बीच की कड़ी है।
  • वित्तीय स्वीकृति: गांव में होने वाले विकास कार्यों, जैसे कि नाली, खड़ंजा, पीएम आवास, मनरेगा मजदूरी आदि का भुगतान, प्रधान और सचिव दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर (डोंगल) से होता है।
  • विवाद का जड़: अक्सर विवाद की जड़ यहीं से शुरू होती है। प्रधान चाहता है कि उसके प्रस्तावों पर तुरंत काम हो और भुगतान किया जाए। जबकि सचिव की यह जिम्मेदारी होती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सभी काम सरकारी मानकों (जैसे जियो-टैगिंग, एमबी बुक) के अनुसार हुए हैं या नहीं। यदि सचिव मानकों की कमी पाता है और भुगतान रोकता है, तो प्रधान इसे अपनी ‘तौहीन’ या ‘अड़ंगा’ मानते हैं।
  • दबाव की राजनीति: कई मामलों में, प्रधान अपने पद के राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर सचिव पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं कि वे बिना जांच-पड़ताल के फाइलों को पास कर दें। ईमानदार अधिकारी जब इस दबाव के आगे नहीं झुकते, तो उन्हें इसी तरह की अभद्रता, धमकी और हिंसा का शिकार होना पड़ता है।

हालांकि, फिरोजपुर खुर्द के मामले में तत्काल विवाद का कारण क्या था, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन जिस तरह से सरकारी अभिलेखों को फाड़ा गया है, उससे यह स्पष्ट है कि मामला पंचायत के किसी काम या भुगतान से जुड़ा हो सकता है।


मंत्री की मौजूदगी और नशे का दुस्साहस

इस पूरी घटना का सबसे निंदनीय पहलू यह है कि यह सब एक राज्यमंत्री की मौजूदगी में, एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुआ।

आरोपियों का दुस्साहस इतना अधिक था कि उन्हें न तो मंत्री की गरिमा का ख्याल आया, न ही ब्लॉक परिसर में मौजूद अन्य अधिकारियों का। यह घटना सीधे तौर पर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को एक खुली चुनौती है।

दूसरा गंभीर पहलू है “शराब के नशे में धुत” होने का आरोप। यदि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि (ग्राम प्रधान) शराब के नशे में धुत होकर सरकारी परिसर में प्रवेश करता है और एक लोक सेवक पर हमला करता है, तो यह उनके पद की गरिमा को भी तार-तार करता है।

पुलिस ने शुरू की जांच, सचिवों में रोष

घटना के बाद, पीड़ित ग्राम पंचायत अधिकारी हर्षित सिंह सीधे कोतवाली शाहाबाद पहुंचे और आरोपी प्रधान विवेक पाण्डेय व उनके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हरदोई पुकार को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस घटना के बाद से शाहाबाद ब्लॉक समेत जिले भर के पंचायत सचिवों में भारी रोष है। उनका कहना है कि वे पहले से ही काम के भारी बोझ तले दबे हैं, और अगर उन्हें इस तरह की हिंसा और धमकी का सामना करना पड़ेगा, तो गांवों में विकास कार्य कैसे संभव हो पाएगा?

पंचायत सचिव संघ ने इस मामले में कड़ी कार्यवाही की मांग की है और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि किसी सरकारी कर्मचारी के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करने की हिम्मत न कर सके।


निष्कर्ष

‘रन फॉर यूनिटी’ के मंच से जहां एकता का संदेश दिया जा रहा था, वहीं चंद कदमों की दूरी पर हुआ यह ‘विभाजनकारी’ और हिंसक कृत्य कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • क्या सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित है?
  • क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को कानून हाथ में लेने का अधिकार है?
  • शराब के नशे में धुत होकर सरकारी काम में बाधा डालने और अभिलेख फाड़ने वालों पर पुलिस कब तक सख्त एक्शन लेगी?

हरदोई पुकार इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए रखेगा। अब देखना यह है कि हरदोई का पुलिस-प्रशासन इस हाई-प्रोफाइल मामले में कितनी तेजी से कार्यवाही करता है और पीड़ित सचिव हर्षित सिंह को न्याय दिला पाता है।

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