“तिराहे पर पुलिस, बगल में अवैध ‘कैंटीन’—अल्लापुर में किसके संरक्षण में खेल?”

हरदोई पुकार —

हरदोई। शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के अल्लापुर में देशी शराब ठेके के बगल स्थित एक निजी दुकान पर अवैध अतिक्रमण, जबरन गेट निर्माण और कैंटीन के नाम पर खुलेआम शराब पिलाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि ठेका संचालक द्वारा लोहे का जाल (जार) लगाकर महिला की दुकान की ओर एक अलग गेट बना दिया गया, जो पूर्णतः अवैध है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना दुकान स्वामिनी की अनुमति किसी की निजी संपत्ति की ओर गेट कैसे खोल दिया गया? क्या इसके लिए कोई प्रशासनिक स्वीकृति ली गई थी, या फिर नियमों को दरकिनार कर मनमानी की गई?

जिस दुकान पर यह गतिविधि संचालित हो रही थी, वह एक महिला के नाम दर्ज है। उनके पति रिटायर्ड फौजी थे, जिनका देहांत हो चुका है। इकलौते पुत्र की भी असमय मृत्यु हो गई। वर्तमान में परिवार में केवल सास और बहू ही हैं। आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति और मजबूरी का फायदा उठाकर दुकान की ओर अवैध गेट लगाकर उसे शराबियों के बैठने और शराब पिलाने के अड्डे में तब्दील कर दिया गया। जबकि वहां बैठाकर शराब पिलाने का किसी के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं है। निजी संपत्ति का इस प्रकार उपयोग न केवल अवैध है, बल्कि कानून का खुला उल्लंघन भी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अल्लापुर तिराहे पर हर समय पुलिस की मौजूदगी रहती है, इसके बावजूद दिनभर शराबियों का जमावड़ा लगा रहा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह सब जिम्मेदार विभागों की जानकारी के बिना हो रहा था, या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा था? आबकारी विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है—बिना लाइसेंस ठेके के बगल में कैंटीननुमा व्यवस्था कर शराब पिलाना आखिर कैसे संभव हुआ?

जब अतिक्रमण और अवैध गतिविधि की हद पार हो गई तो दोनों सास-बहू स्वयं दुकान पर पहुंचीं। उन्होंने मौके पर विरोध जताया, अवैध गेट और कब्जे पर आपत्ति दर्ज की तथा वहां बैठे शराब पी रहे लोगों को खदेड़ दिया। महिलाओं का कहना है कि यह उनकी निजी संपत्ति और आजीविका का साधन है, जिसे जबरन बदनाम और नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

आक्रोशित महिलाओं ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर अवैध अतिक्रमण हटाने, बिना अनुमति लगाए गए गेट को तत्काल हटवाने, कैंटीन के नाम पर चल रही शराबखोरी पर रोक लगाने और संबंधित ठेका संचालक व जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है—या फिर अल्लापुर में कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल यूं ही गूंजते रहेंगे।