
हरदोई। जनपद में पारंपरिक खेती को पीछे छोड़ किसान अब आधुनिक डीएसआर (धान की सीधी बुआई) तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं। पिछले साल मात्र 800 हेक्टेयर में आज़माई गई इस तकनीक से 65.70 क्विंटल/हेक्टेयर का शानदार उत्पादन मिला। इसी सफलता को देखते हुए कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में 5000 हेक्टेयर में सीधी बुआई का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
रफ्तार पकड़ रही है मुहिम
विकास खंड बावन और कोथावाँ में अब तक करीब 200 हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। जहाँ बावन के नायब सिंह, शिव प्रकाश और आनंद कुमार जैसे दर्जनों किसानों ने इसे बड़े पैमाने पर अपनाया है, वहीं कोथावाँ के ग्राम कुर्सी निवासी जयदीप द्विवेदी ने 30 एकड़ में सीधी बुआई कर मिसाल पेश की है।
उप कृषि निदेशक का निरीक्षण और खास सलाह
उप कृषि निदेशक सतीश पांडेय ने नयागांव में किसान राहुल कुमार के खेत का निरीक्षण किया, जहाँ पीआर-126 प्रजाति के बीज (10 किग्रा/एकड़) को थायरम से उपचारित कर ‘लकी सीडर’ मशीन से बोया गया था।
अधिकारियों ने किसानों के लिए कुछ ज़रूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
सही समय: बुआई के लिए 25 मई से 15 जून का समय सबसे उत्तम है।
मशीनें: स्टेप सीडर, लकी सीडर, सीड ड्रिल या सुपर सीडर का प्रयोग करें।
खरपतवार नियंत्रण: बुआई के तुरंत बाद पेंडीमेथिलिन खरपतवारनाशी का छिड़काव कर सिंचाई करें।
डीएसआर के बड़े फायदे: इस तकनीक से नर्सरी तैयार करने और रोपाई का झंझट खत्म होता है। पानी, बीज और मजदूरी की बचत होने से खेती की लागत में 40 से 50% तक की कमी आती है। साथ ही, फसल जल्दी पकने से रबी (गेहूं आदि) की बुआई भी समय पर संभव हो पाती है।
फसल का भी लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान ग्राम सकतपुर में किसान अनुज सिंह के खेत में गन्ने के साथ सह-फसल के रूप में उगाई गई उर्द (कृषि विभाग द्वारा मुफ्त मिनीकिट) का भी अवलोकन किया गया। इस दौरान सदर के उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी और बावन बीज भंडार प्रभारी सहित कई प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
— हरदोई पुकार